सफर में धूप तो होगी

By heenaparekh  

सफर में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो

सभी हैं भीड में तुम निकल सको तो चलो

किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं

तुम अपने आप को खुद बदल सको तो चलो

यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता

मुझे गिरा के अगर तुम सँभल सको तो चलो

कहीं नहीं कोई सूरज धुवाँ धुवाँ है फिजा

खुद अपने आप से बाहर निकल सको तो चलो

यही है जिन्दगी कुछ ख्वाब चंद उम्मीदें

ईन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो

( निदा फाजली )

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3 Comments

  1. Posted June 26, 2008 at 5:25 am | Permalink | Reply

    किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं
    तुम अपने आप को खुद बदल सको तो चलो

    સરસ !

    - ધવલ

  2. Posted June 28, 2008 at 4:39 am | Permalink | Reply

    यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता

    मुझे गिरा के अगर तुम सँभल सको तो चलो
    wow! dundar.

  3. Posted June 28, 2008 at 8:06 am | Permalink | Reply

    નીદા મારા પસંદગીના શાયર એમના અલગજ અંદાઝમાં આ ગઝલ સાંભળેલી મજા આવી

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