रिश्ते बस रिश्ते होते हैं

रिश्ते बस रिश्ते होते है

कुछ ईक पल के

कुछ दो पल के

कुछ परों से हलके  होते हैं

बरसों के तले चलते-चलते

भारी-भरकम हो जाते हैं

कुछ भारी-भरकम बर्फ के-से

बरसों के तले गलते-गलते

हलके-फुलके हो जाते हैं

नाम होते हैं रिश्तों के

कुछ रिश्ते नाम के होते हैं

रिश्ता वह अगर मर जाऍ भी

बस नाम से जीना होता है

बस नाम से जीना  होता है

रिश्ते बस रिश्ते होते हैं

( गुलजार )

One thought on “रिश्ते बस रिश्ते होते हैं

  1. Phir se padhi aur phir-se padhi samaj me nahi aata ke is dharti par to shirf rishte namkehi hote he . Upar jo jo gaya usine kabhi nahi bataya ke
    rishte kya hei.
    PostedBy:Chandra.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *