जिन्दगी तुने लहू लेके

By heenaparekh  

जिन्दगी तुने लहू लेके दिया कुछ भी नहीं

तेरे दामन में मेरे वास्ते क्या कुछ भी नहीं

आप ईन हाथों की चाहें तो तलाशी ले लें

मेरे हाथों में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं

हमने देखा है कई ऎसे खुदाओं को यहॉ

सामने जिनके वो सचमुच का खुदा कुछ भी नहीं

ये अलग बात है वो रास न आया खुदको

उस भले श्ख्स में वैसे तो बुरा कुछ भी नहीं

बातें फैली हैं मेरे नाम से जाने क्या-क्या

जब कि सच ये है कि मैंने तो कहा कुछ भी नहीं

ऎ खुदा! अबके ये किस रंग में आई है बहार

जर्द ही जर्द है पेडों पे हरा कुछ भी नहीं

दिल भी ईक बच्चे की मानिंद अडा है जिद पर

या तो सब कुछ ही ईसे चाहिये या कुछ भी नहीं

( राजेश रेड्डी )

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2 Comments

  1. Kunal
    Posted July 10, 2008 at 6:31 pm | Permalink | Reply

    very gud gazal ….

    it’s in the Jagjit Singh’s album called “Face to Face” …

    first listened when i was in 10th … and this album was the reason i got inclined to gazals and gradually to Urdu itself !!

  2. Posted July 11, 2008 at 2:46 pm | Permalink | Reply

    बातें फैली हैं मेरे नाम से जाने क्या-क्या

    जब कि सच ये है कि मैंने तो कहा कुछ भी नहीं
    saras pankti

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