तारों की झिलमिल

By heenaparekh  

तारों की झिलमिल से

कोई बिछुडा दिल यदि मिलता है तो मिल लेने दो.

तुम ने था जो दीप जलाया

साँझ हुई तो वह घबराया

तम-किरणों की घुल-मिल में

नव-दीपक कोई जलता है तो जल लेने दो.

तुम ने था जो फूल खिलाया

वह तो पतझर में मुरझाया

मन सावन की रिमझिम से

यदि नया सुमन कोई खिलता है, खिल लेने दो.

नभ से जो सरिता है आयी

उस से प्यास नहीं बुझ पायी

आँसू की निर्मल कल-कल से

कोई गंगा ढलती है तो ढल लेने दो.

अब तक जो हैं गीत सुनाये

वे मेरे थे या कि पराये

उन गीतों की सरगम से

यदि कोई पीडा हँसती है तो हँस लेने दो.

( मुनि रूपचन्द्र )

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4 Comments

  1. Ashok
    Posted July 31, 2008 at 9:31 am | Permalink | Reply

    nice coolection …..and hard work also…keep it up..Ashok

  2. chandra
    Posted July 31, 2008 at 10:36 pm | Permalink | Reply

    what a beautiful hindi-urdu kavita, fantastic
    keep your hard work.
    chandra.

  3. Posted August 1, 2008 at 10:20 am | Permalink | Reply

    nice coolection

  4. raju kadam
    Posted August 1, 2008 at 3:47 pm | Permalink | Reply

    superb

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