मुझे दे दो

तुम अपना रंज-ओ-गम, अपनी परेशानी मुझे दे दो

तुम्हें उन की कसम, ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो

मैं देखूं तो सही, दुनिया तुम्हें कैसे सताती है

कोई दिन के लिए अपनी निगहबानी मुझे दे दो

ये माना मैं किसी काबिल नहीं हूँ ईन निगाहों में

बुरा क्या है अगर ईस दिल की वीरानी मुझे दे दो

वो दिल जो मैंने माँगा था मगर गैरों ने पाया था

बडी शै है अगर उस की पशेमानी मुझे दे दो

( साहिर लुधियानवी )

[निगहबानी – देख रेख, वीरानी – उजडापन, पशेमानी – पछ्तावा]

3 thoughts on “मुझे दे दो

  1. are aapne jo ye kavita kaho ya gazal . dil me eisi
    chubh gai aur aankome aansu aagaya.purani yaade taji kardi.aapka shukriya .malik aapko bahot tarraki de eisi dunwae.
    comment by:
    Chandra.

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