मेरे तो गिरधर गोपाल

By heenaparekh  

मेरे तो गिरधर गोपाल,

दूसरो न कोई I

जाके सिर मोर मुकुट,

मेरो पति सोई II

छांडि दई कुल की कानि,

कहा करिहै कोई I

संतन ढिंग बैठि-बैठि,

लोक लाज खोई II

अंसुवन जल सींचि-सींचि,

प्रेम बेलि बोई I

अब तो बेल फैल गई,

आनन्द फल होई II

भगत देखि राजी हुई,

जगत देखि रोई I

दासी मीरा लाल गिरधर,

तारो अब मोहीं II

मेरे तो गिरधर गोपाल,

दूसरो न कोई II

( मीराबाई )

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One Comment

  1. chandra.
    Posted August 25, 2008 at 7:24 pm | Permalink | Reply

    Mera sabse pasand bhajan bheja,bahot khushi
    hui.
    commentby:
    Chandra.

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