मेरे तो गिरधर गोपाल,
दूसरो न कोई I
जाके सिर मोर मुकुट,
मेरो पति सोई II
छांडि दई कुल की कानि,
कहा करिहै कोई I
संतन ढिंग बैठि-बैठि,
लोक लाज खोई II
अंसुवन जल सींचि-सींचि,
प्रेम बेलि बोई I
अब तो बेल फैल गई,
आनन्द फल होई II
भगत देखि राजी हुई,
जगत देखि रोई I
दासी मीरा लाल गिरधर,
तारो अब मोहीं II
मेरे तो गिरधर गोपाल,
दूसरो न कोई II
( मीराबाई )



One Comment
Mera sabse pasand bhajan bheja,bahot khushi
hui.
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Chandra.