जब मैं न रहूँ

जब मैं न रहूँ

तब तुम अपने हियांगन में

सृष्टि का सारा सौन्दर्य

सहेज लेना

जो मैं न सहेज पायी

जब मैं न रहूँ

तब तुम अपने नयनों से

प्रकृति का सारा पीयूष

पी लेना

जो मैं न पी पायी

जब मैं न रहूँ

तब तुम अपने हाथों से

दीन-दुखियों का सारा दर्द

मथ लेना

जो मैं न मथ पायी

जब मैं न रहूँ

तब तुम अपनी मृदुल मुस्कानों से

श्रान्त क्लान्त का सारा क्लेश

हर लेना

जो मैं न हर पायी.

( शीला गुजराल )

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