http://heenaparekh.com/2008/09/28/01-7/
जब मैं न रहूँ
तब तुम अपने हियांगन में
सृष्टि का सारा सौन्दर्य
सहेज लेना
जो मैं न सहेज पायी
जब मैं न रहूँ
तब तुम अपने नयनों से
प्रकृति का सारा पीयूष
पी लेना
जो मैं न पी पायी
जब मैं न रहूँ
तब तुम अपने हाथों से
दीन-दुखियों का सारा दर्द
मथ लेना
जो मैं न मथ पायी
जब मैं न रहूँ
तब तुम अपनी मृदुल मुस्कानों से
श्रान्त क्लान्त का सारा क्लेश
हर लेना
जो मैं न हर पायी.
( शीला गुजराल )



2 Comments
Wah wah, kya kavita he
Jab mei na rahu…………………bahot sundar.
CommentBy:
Chandra.
I like this very much. Keep it up