चलो एक बार

चलो एक बार फिर से,

अजनबी बन जाए हमदोनों

न मैं तुमसे कोई उम्मीद

रखुं दिल नवाजी की,

न तुम मेरी तरफ देखो

गलत अंदाज नजरो से.

न मेरे दिल की धडकन,

लडखडाये मेरी बातों से.

न जाहीर हो तुम्हारी

कश्मकश का राझ नजरो से.

तआरुक रोग हो जाए

तो उसका भूलना बहेतर.

तआल्लुक बोज बन जाए

तो उसका तोडना अच्छा.

वो अफसाना जिसे अंजाम तक

लाना न हो मुमकीन,

उसे खुबसुरत मोड

देकर छोडना अच्छा.

( साहिर लुधियानवी )

[ तआरुक-પરિચય, तआल्लुक-સંબંધ]

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