दीपक दीपक

दीपक दीपक

रोशनी से अब काम नहीं चलेगा

अंधेरा डस रहा है गांव पूरा

तुम अपने द्वार पर

दीपक रखे

लक्ष्मी का गर करते रहे इंतजार

तो वह तुम्हारे गांव के

बाहर से गुजर जायेगी

अपने अपने आंगन के

उजियारे की कब तक सोचते रहोगे

गलियों पनघट

और चौपाल पर भी

तो रोशनी चाहिये न !

आओ

इन सारी बातियों को मिलाकर

एक मशाल बना लें.

( डो. गोपाल शर्मा सहर )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *