सच्ची वात

सच्ची वात कही थी मैंने

लोगों ने सूली पे चढाया

मुझको जहर का जाम पिलाया

फिर भी उनको चै ना आया

सच्ची वात कही थी मैंने..

लेके जहां भी वक्त गया है

जुल्म मिला है जुल्म सहा है

सच्च का ये ईनाम मिला है

सच्ची वात कही थी मैंने..

सब से बेहतर कभी ना बनना

जग के रहबर कभी ना बनना

पीर पैयम्बर कभी ना बनना

सच्ची वात कही थी मैंने..

चुप रह कर ही वक्त गुजारो

सच कहने पे जां मत वारो

कुछ तो सीखो मुझसे यारो

सच्ची वात कही थी मैंने..

( साबिर दत्त )

2 thoughts on “सच्ची वात

  1. એક જ શબ્દ “અદ્દભૂત”! અને આ પંક્તિઓ જ્યારે હું જગજીતસિંગના અવાજમાં સાંભળીને મારા મનનો ઉચાટ મેં શાંત કર્યો છે.

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