सच्ची वात

By heenaparekh  

सच्ची वात कही थी मैंने

लोगों ने सूली पे चढाया

मुझको जहर का जाम पिलाया

फिर भी उनको चै ना आया

सच्ची वात कही थी मैंने..

लेके जहां भी वक्त गया है

जुल्म मिला है जुल्म सहा है

सच्च का ये ईनाम मिला है

सच्ची वात कही थी मैंने..

सब से बेहतर कभी ना बनना

जग के रहबर कभी ना बनना

पीर पैयम्बर कभी ना बनना

सच्ची वात कही थी मैंने..

चुप रह कर ही वक्त गुजारो

सच कहने पे जां मत वारो

कुछ तो सीखो मुझसे यारो

सच्ची वात कही थी मैंने..

( साबिर दत्त )

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2 Comments

  1. Posted December 29, 2008 at 9:58 am | Permalink | Reply

    એક જ શબ્દ “અદ્દભૂત”! અને આ પંક્તિઓ જ્યારે હું જગજીતસિંગના અવાજમાં સાંભળીને મારા મનનો ઉચાટ મેં શાંત કર્યો છે.

  2. Chandra
    Posted June 14, 2009 at 5:32 pm | Permalink | Reply

    sachi baat kahi thi meine,,,,
    logone sulipe chadaya
    muje zaher ka jaam pilaya
    VERY GOOD ONE. . . .

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