अहसास की नदी में कभी डूबके तो देख
आँखों की ईस नमी में कभी डूबके तो देख
पैमाने अपने आप ही भर जाएगा तेरा
औरों की तिशनगी में कभी डूबके तो देख
बिख्ररे पडे है खुशियों के मोती यहाँ-वहाँ
तू अपनी जिन्दगी में कभी डूबके तो देख
आ जाएंगी समझ में जो बातें हैं अनकही
लफ्जों की खामुशी में कभी डूबके तो देख
मुमकिन है जिन्दगी का ये अंदाजे-ईश्क हो
तू उसकी बेरुखी में कभी डूबके तो देख
( राजेश रेड्डी )



3 Comments
It is good poem I love it and i rate as 5 star becoz it’s just touch my heart
तू उसकी बेरुखी में कभी डूबके तो देख
this one is the best.
i love this poem…
thanks heena ben
great work
very nice poem, mere deel ko bha gai.