ये मुमकिन नहीं

By heenaparekh  

हम उन्हें याद आये ये मुमकिन नहीं,

हम उन्हें भूल जाये ये मुमकिन नहीं.

गेब से नग्मा-संजीदा आते सुखन,

अब हमें ना बुलाये ये मुमकिन नहीं.

शोरे-मेहशर अभीसे मैं सुनने लगा

अब मुजे निंद आये ये मुमकिन नहीं.

ईस जमीं पर तो मेरा ठिकाना नहीं,

आसमां झूक के आये ये मुमकिन नहीं.

में तो सहरा की रेती हूं, मिलने मुजे

एक समंदर भी आये ये मुमकिन नहीं

( हरीन्द्र दवे )

Share

One Comment

  1. kanakshi dungarshi
    Posted March 24, 2009 at 9:04 am | Permalink | Reply

    Aapne sahi famaya. Ye bikul sahi hai.

Post a Comment

Your email is never shared. Required fields are marked *

*
*
Powered By Indic IME