हम उन्हें याद आये ये मुमकिन नहीं,
हम उन्हें भूल जाये ये मुमकिन नहीं.
गेब से नग्मा-संजीदा आते सुखन,
अब हमें ना बुलाये ये मुमकिन नहीं.
शोरे-मेहशर अभीसे मैं सुनने लगा
अब मुजे निंद आये ये मुमकिन नहीं.
ईस जमीं पर तो मेरा ठिकाना नहीं,
आसमां झूक के आये ये मुमकिन नहीं.
में तो सहरा की रेती हूं, मिलने मुजे
एक समंदर भी आये ये मुमकिन नहीं
( हरीन्द्र दवे )



One Comment
Aapne sahi famaya. Ye bikul sahi hai.