…नहीं देखा

By heenaparekh  

आंखो में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा,

कश्ती के मुसाफिर ने समन्दर नहीं देखा I

बेवक्त अगर जाऊँगा, सब चौंक पडेंगे,

ईक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा I

जिस दिन से चला हूँ मेरी म्ंजिल पे नजर है,

आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा I

ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं,

तुमने मेरा काँटों-भरा बिस्तर नहीं देखा I

पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला,

मैं मोम हूँ उसने मुझे छूकर नहीं देखा I

( बशीर बद्र )

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One Comment

  1. pinke
    Posted April 6, 2009 at 3:33 pm | Permalink | Reply

    very very nice.

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