सपना जिन्दा है

धरती और आकाश का रिश्ता
जुडा हुआ है
ईसलिए चिडिया उडती है
ईसलिए नदिया बहती है
ईसलिए है
चाय् की प्याली में
कडवाहट
ईसीलिए तो
चेहरा बनती है हर आहट
धरती और आकाश का रिश्ता
जुडा हुआ है
ईसीलिए तो
कहीं-कहीं से कुछ अच्छा है
कुछ खोटा है
कुछ सच्चा है
सामनेवाली खिडकी
जूडा बाँध रही है
धीमे-धीमे
सोया रस्ता जाग रहा है
उछल रही है तंग गली में
गेंद रबड की
उसके पीछे पीछे
बच्चा भाग रहा है
रात और दिन के बीच
कहीं सपना जिन्दा है
मरी नहीं है
अब तक ये दुनिया जिन्दा है !
धरती और आकाश का रिश्ता जुडा हुआ है
( निदा फाजली )

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