सपना जिन्दा है

By heenaparekh  

धरती और आकाश का रिश्ता
जुडा हुआ है
ईसलिए चिडिया उडती है
ईसलिए नदिया बहती है
ईसलिए है
चाय् की प्याली में
कडवाहट
ईसीलिए तो
चेहरा बनती है हर आहट
धरती और आकाश का रिश्ता
जुडा हुआ है
ईसीलिए तो
कहीं-कहीं से कुछ अच्छा है
कुछ खोटा है
कुछ सच्चा है
सामनेवाली खिडकी
जूडा बाँध रही है
धीमे-धीमे
सोया रस्ता जाग रहा है
उछल रही है तंग गली में
गेंद रबड की
उसके पीछे पीछे
बच्चा भाग रहा है
रात और दिन के बीच
कहीं सपना जिन्दा है
मरी नहीं है
अब तक ये दुनिया जिन्दा है !
धरती और आकाश का रिश्ता जुडा हुआ है
( निदा फाजली )

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3 Comments

  1. Chandra
    Posted May 3, 2009 at 8:07 pm | Permalink | Reply

    dharti aur aakash ka reeshta juda hua he

    jab tak ye duniya jeenda he.

  2. pinke
    Posted May 4, 2009 at 7:35 pm | Permalink | Reply

    NICE THOUGHT.

  3. Dr.Kusum Rawal
    Posted May 4, 2009 at 7:41 pm | Permalink | Reply

    Samjo to ghanu chhe…

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