मैं

मैं?

आम की झुकी हुई डाल पर

झूलने वाला

वह अधफूटा घडा

जिस में कि कोई खूबसूरती नहीं है

पर ईतना जरुर है

कि पानी से भरा हूं

अत: मेरे पास आने वाला

कोई भी थका-माँदा पंछी

कभी भी प्यासा नहीं लौट सकता I

( मुनि रुपचन्द्र )

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