http://heenaparekh.com/2009/06/02/%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82/
मैं?
आम की झुकी हुई डाल पर
झूलने वाला
वह अधफूटा घडा
जिस में कि कोई खूबसूरती नहीं है
पर ईतना जरुर है
कि पानी से भरा हूं
अत: मेरे पास आने वाला
कोई भी थका-माँदा पंछी
कभी भी प्यासा नहीं लौट सकता I
( मुनि रुपचन्द्र )



One Comment
સુંદર કાવ્યાત્મક સંદેશ.