मैं

By heenaparekh  

मैं?

आम की झुकी हुई डाल पर

झूलने वाला

वह अधफूटा घडा

जिस में कि कोई खूबसूरती नहीं है

पर ईतना जरुर है

कि पानी से भरा हूं

अत: मेरे पास आने वाला

कोई भी थका-माँदा पंछी

कभी भी प्यासा नहीं लौट सकता I

( मुनि रुपचन्द्र )

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One Comment

  1. Posted June 2, 2009 at 3:22 pm | Permalink | Reply

    સુંદર કાવ્યાત્મક સંદેશ.

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