बेवफा

बेवफा रास्ते बदलते हैं,
हमसफर साथ-साथ चलते हैं.

किसके आँसू छिपे हैं फूलों में,
चूमता हूँ, तो होंठ जलते हैं.

उसकी आँखों को गौर से देखो,
मन्दिरों में चराग जलते हैं.

दिल में रहकर नजर नहीं आते,
ऐसे काँटे कहाँ निकलते हैं.

एक दीवार वो भी शीशे की,
दो बदन पास-पास जलते हैं.

काँच के, मोतियों के, आँसू के,
सब खिलौने गजल में ढलते हैं.

( बशीर बद्र )

6 thoughts on “बेवफा

  1. ek deevar vo bhi shishe ki
    do badan pas-pas jalte he
    kanch ke, motiyon ke,aansu ke
    sab khilone ghazal me dhalte he

    wah
    r-haday ne shparshi, khub ja sundar ghazal.
    Chandra

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.