यूँ देखिये तो

यूँ देखिये तो आँधी में बस ईक शजर गया
लेकिन न जाने कितने परिन्दों का घर गया

जैसे गलत पते पे चला आए कोई शख
सुख ऎसे मेरे दर पे रुका और गुजर गया

मैं ही सबब था अबके भी अपनी शिकस्त का
ईल्जाम अबकी बार भी किस्मत के सर गया

अर्से से दिल ने की नहीं सच बोलने की जिद
हैरान हूँ मैं कैसे ये बच्चा सुधर गया

उनसे सुहानी शाम का चर्चा न कीजिए
जिनके सरों पे धूप का मौसम ठहर गया

जीने की कोशिशों के नतीजे में बारहा
महसूस ये हुआ कि मैं कुछ और मर गया

( राजेश रेड्डी )

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