तारों के दीपक

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तारों के दीपक धरे नील गगन के धार
आज धरा से व्योम तक दीपों का त्यौहार

प्रेम दिया ऐसे जले प्रीत प्यार के संग
मन ड्योढी पर काढ लें रंगोली के रंग

अपनी देहरी सब करे दीपों की भरमार
एक दिया तो स्नेह का रखो पडौसी द्वार

नेह दिया ले हाथ में कर दुल्हन शृंगार
रूप फुलझडी जल उठी मन में छुटे अनार

कोंख अमावस की लगा हो जायेगी बांझ
अन्धियारे का पाहुना चला जायेगा सांझ

(- आर सी शर्मा ‘आरसी’  की रचना से अंश )

One thought on “तारों के दीपक

  1. Dear Heenaben,

    Selection & wording of diwali card is nice – Good choice too.

    Poem itself has touching comments about all.

    Wishing Very happy diwali & new year to Dear all reader & creative team of Heenaben.

    Jay Mataji
    Prakash GADHAVI

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