http://heenaparekh.com/2011/05/05/kaun-kare/
सुरमई रात के सितारे है
आज दोनों जहां हमारे है
सुबह का ईंतजार कौन करे !
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फिर यह रुत यह समां मिले न मिले
आरजू का चमन खिले न खिले
वक्त का एतबार कौन करे !
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ले भी लो हम को अपनी बाहों में
रुह बेचैन है निगाहों में
ईलतिजा बार बार कौन करे !
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( साहिर लुधियानवी )
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[ एतबार = भरोसा, रुह – आत्मा, ईलतिजा = विनती ]



2 Comments
वाह कया बात है!!
सपना
कौन कितना बेचैन है – कोई पास तो आये – तो पता चलें…