कौन करे – साहिर लुधियानवी

सुरमई रात के सितारे है

आज दोनों जहां हमारे है

सुबह का ईंतजार कौन करे !

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फिर यह रुत यह समां मिले न मिले

आरजू का चमन खिले न खिले

वक्त का एतबार कौन करे !

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ले भी लो हम को अपनी बाहों में

रुह बेचैन है निगाहों में

ईलतिजा बार बार कौन करे !

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( साहिर लुधियानवी )

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[ एतबार = भरोसा, रुह – आत्मा, ईलतिजा = विनती ]

2 thoughts on “कौन करे – साहिर लुधियानवी

  1. कौन कितना बेचैन है – कोई पास तो आये – तो पता चलें…

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