कौन करे – साहिर लुधियानवी

By heenaparekh  

सुरमई रात के सितारे है

आज दोनों जहां हमारे है

सुबह का ईंतजार कौन करे !

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फिर यह रुत यह समां मिले न मिले

आरजू का चमन खिले न खिले

वक्त का एतबार कौन करे !

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ले भी लो हम को अपनी बाहों में

रुह बेचैन है निगाहों में

ईलतिजा बार बार कौन करे !

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( साहिर लुधियानवी )

.

[ एतबार = भरोसा, रुह – आत्मा, ईलतिजा = विनती ]

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2 Comments

  1. Posted May 5, 2011 at 6:14 pm | Permalink | Reply

    वाह कया बात है!!
    सपना

  2. क्रिश्ना
    Posted May 6, 2011 at 12:08 am | Permalink | Reply

    कौन कितना बेचैन है – कोई पास तो आये – तो पता चलें…

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