मेरा संदेश – ओशो

By heenaparekh  

मेरा संदेश छोटा सा है:

आनंद से जीओ

और जीवन के समस्त रंगो को जीओ,

सारे स्वरों को जीओ

कुछ भी निषेध नहीं करना है

जो भी परमात्मा का है, शुभ है

जो भी उसने दिया है, अर्थपूर्ण है

उसमें से किसी भी चीज का इनकार करना,

परमात्मा का ही इनकार है, नास्तिकता है

और तब एक अपूर्व क्रांति घटती है

जब तुम सबको स्वीकार कर लेते हो

और आनंद से जीने लगते हो तो

तुम्हारे भीतर रुपांतरण की प्रक्रिया शुरु होती है

तुम्हारे भीतर की रसायन बदलती है –

क्रोध करुणा बन जाता है;

काम राम बन जाता है

तुम्हारे भीतर कांटे फूलों की तरह खिलने लगते है

 .

( ओशो )

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4 Comments

  1. Bhagavnji
    Posted August 17, 2011 at 12:33 pm | Permalink | Reply

    dear mam

    it is among one of the best massage for life.

  2. nj
    Posted August 17, 2011 at 7:04 pm | Permalink | Reply

    સરસ મારો પ્રિય ફિલોસોફર જે કૈ પરમાત્મા નુ તે શુભ સરસ સરસ સરસ

  3. Dr. Anjana
    Posted August 21, 2011 at 4:17 pm | Permalink | Reply

    I Like Oshovani

  4. Posted August 26, 2011 at 1:46 pm | Permalink | Reply

    I Love Osho as you are.

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