अंजाम नहीं होता – मीनाकुमारी

By heenaparekh  

आगाज तो होता है अंजाम नहीं होता

जब मेरी कहानी में वह नाम नहीं होता

 .

जब जुल्फ की कालिख में गुम जाए कोई राही

बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता

.

हंस-हंस के जवां दिल के हम क्यों न चुनें टुकडे

हर शख्स की किस्मत में ईनाम नहीं होता

 .

बहते हुए आंसू ने आंखों से कहा थम कर

जो मय से पिघल जाए वह जाम नहीं होता

 .

दिन डूबे हैं या डूबी बारात लिए कश्ती

साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता

 .

( मीनाकुमारी )

 .

[ आगाज = आरम्भ, अंजाम = अंत, मय = मदिरा ]

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One Comment

  1. Posted October 4, 2011 at 1:03 am | Permalink | Reply

    शुभानल्लाह…!!!

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