बात किस से करे – ‘सागर’ बुरहानपुरी

By heenaparekh  

बात किस से करे के मन भी नहीं

हमजबाँ कोई हमरुखन भी नहीं

 .

न तो कमरा है और न तनहाई

पहले जैसी वो अंजुमन भी नहीं

 .

अजनबी लोग अजनबी चहेरे

हम वतन में है बेवतन भी नहीं

 .

कितनी लाशों को दफन करना है

घर में दो गज कफन भी नहीं

 .

ले के जाउं कहां उन्हें ‘सागर’

अब तो अकबर के नौ रतन भी नहीं

 .

 ( ‘सागर’ बुरहानपुरी )

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2 Comments

  1. Posted December 9, 2011 at 4:03 pm | Permalink | Reply

    अच्छी रचना है…

  2. MAYUR BHOGAYTA
    Posted December 12, 2011 at 9:39 am | Permalink | Reply

    ખૂબ જ સરસ

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