या खुदा ! – राजेश रेड्डी

या खुदा ! कैसे ज़माने आ गए

फ़ैसला क़ातिल सुनाने आ गए

 .

लोग जी लेते हैं कैसे ज़िन्दगी

होश अपने तो ठिकाने आ गए

 .

ढूँढने निकले थे हम तो इक ख़ुशी

हाथ में ग़म के ख़जाने आ गए

 .

हमने रोए जिनके आँसू उम्र भर

वो भी हम पर मुस्कुराने आ गए

 .

इक पुराने ग़म से हम निकले ही थे

कुछ नए ग़म आज़माने आ गए

.

( राजेश रेड्डी )

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