Roy (2015)

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Roy (2015)
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Director: Vikramjit Singh
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Writer: Vikramjit Singh
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Star Cast: Arjun Rampal, Jacqueline Fernandez, Ranbir Kapoor, Anupam Kher, Shernaz Patel, Rajat Kapoor
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It is a movie about what you are that only you know better with your feelings and emotions. It is all about the journey what you walked yourself. Nobody can judge who you are until and unless they put their feet in your shoes and walk through the path, you walked.
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“रोय” एक कहानी है कहानीकार की. एक बालक अपनी बहोत सारी स्मृतियों में से एक नकारात्मक घटना की गहेरी छाप को साथ में ले कर पलता है. जिसकी असर उसके व्यवसाय में भी दिखाई देती है और उसके जीवन की तरहा ही उसकी कहानी में भी नकारात्मक घटना का विलन, हिरो बनकर उभर आता है.
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ईस चित्रपट के बारे में बहोत सारे विवेचन अब तक आ गये है. जिस में चित्रपट की कहानी के बारे में लिखा गया है, या तो script को ध्यान में रखते हुए उसका मूल्यांकन हुआ है. प्रथम प्रयास में शायद समजने में कठिन लगे ऐसी ये कहानी script से आगे जाकर बहोत गहन संवेदनाओं के साथ ईन्सान को जोडती है.
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एश्वर्या राय, संजय दत्त और झायेद खान के चित्रपट “शब्द” के बारे में बहोत सारे लोग अनजान होंगे. बहोत कम लोगों ने ये नाम सुना होगा. “शब्द” की कहानी और “रोय” की कहानी काफी हद तक मिलतीजुलती है. दोनों में महत्वपूर्ण अन्तर ये है कि “शब्द” का climax नकरात्मक था जो एक जीवन को व्यर्थ अंत की और ले जा रहा था. और “रोय” का climax हकारात्मक है जो दोनों ईन्सानों के जीवन को एक नयी उर्जा के साथ एक नयी दिशा में ले जा रहा है.
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कहानी या script की अपेक्षा रखकर चित्रपट देखने वाली व्यक्ति को ये चित्रपट देख कर निराशा हो सकती है. परंतु सिर्फ दिल के साथ गुफ्तगु करने वाली व्यक्ति ये चित्रपट के थोडे light dialogues के साथ heavy feelings का सातत्य बना पाएगी.
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कहानीकार के किरदार के लिए अर्जुन रामपाल गलत पसंद हो सकते है. जेकलीन के हिस्से में उसके किरदार को न्याय देने के लिए ईतना कुछ आया नहीं है…वो भी उसका double role होने के बाबजूद. रनबीर कपूर उसकी multi talent साबित करते है.
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एक कहानीकार अपने चित्रपट के लिए कहानी लिखता है तभी अपनी आसपास की दुनिया में से ही कहानी ढूंढने की कोशिश करता है. कभी कभी खुद के जीवन के हिस्से को ही कहानी के रूप में लिखता है, और तभी कहानी वास्तविकता के ज्यादा करीब होती है. कहानीकार को समजने के लिए सबसे सरल माध्यम उसकी कहानी है. फिर भी हरबार एसा नहीं भी हो सकता है.
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Music is awesome, fantastic song, lovely lyrics. Any song you can pick and enjoy them any moment. परंतु चित्रपट में गीत कहानी के प्रवाह के साथ एक ताल में बैठते नहीं है. तो कभी कहानी के कुछ भाग में संगीत अधूरा रहे जाता है एसा एहसास होता है.

दिमाग को घर पर रख कर देखने वाले चित्रपट को 400 crores की क्लब में पहुचाने से अच्छा तो अगर दिमाग घर पर ही रखना है तो दिल को साथ में रख कर एक बार देखने जैसा चित्रपट बना है “रोय”.
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Nice cinematography, good fight sequences, superb music, awesome lyrics, touchy dialogues, fantastic acting, poor script and story, average casting…all and above worth watching once with all your heart and mind.
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समीक्षा : काजल शाह

आलेखन : हिना पारेख “मनमौजी”

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