रखजा-हनीफ साहिल

भूली बिसरी कहानीयां रखजा,
कुछ तो अपनी निशानीयां रखजा.

फिर न रक्से बहार याद आए,
झर्द शाखों पे तितलीयां रखजा.

कच्ची नींदों के ख्वाब की ताबीर,
आज पलकों के दरमियां रखजा.

हिज्र की ईन सियाह रातों में,
चांदनी की तजल्लीयां रखजा.

मेरे लफझों को शादमानी दे,
फिर गजल में रवानीयां रखजा.

तेरी मेरी शरारतें शिकवे,
अपनी बातें पुरानीयां रखजा.

आज दरिया भी है अकेला हनीफ,
ईस पे यादों की कश्तीयां रखजा.

( हनीफ साहिल )

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