सलाम-जिज्ञेश अध्यारु

सलाम
प्यारे भाइयो बहेनो
सबको सलाम..

बोतल को सलाम
उसमे पेट्रोल भरने वाले को सलाम
उसे जलाने वाले को सलाम
उसकु फेंकने वाले को सलाम
पत्थर इकठ्ठे करने वाले को सलाम
उसको छत पे पहुचाने वाले को सलाम
गुलेल बनाने वाले को सलाम
पत्थर फेंकने वाले को सलाम
निशान लगाने वाले को सलाम
हाथ में बंदूक लहराने वाले को सलाम

इन सब के लिये घर की छत देने वाले को सलाम
पैसे देने वाले पठ्ठे को सलाम
हिंमत देने वाले पोलिटिशीयन को सलाम
कवर करने वाले भांड पत्रकारों को सलाम
टी.वी. पर उसे देखने वाले को सलाम
और ‘हम बच गए’ कहकर
टी.वी. बन्ध करके
सदियों तक
सो जाने वाले को सलाम
उनके अफसोस को सलाम
उनके दु:ख को सलाम
सोशियल मीडिया पे उर्दू के
शेर चिपकाने वाले को सलाम
और इसके मकसद
भूल जानेवाले को सलाम
उसको समजे बिना
वाह करने वाले को सलाम
सलाम
प्यारे भाइयो बहेनो
सबको सलाम…

चारसौ बार छुरा मारने वाले की हैवानियत को सलाम
लाश को गटर में फेंकने वाले की
महेनत को सलाम
उन सबकी पूज्य माँ को सलाम
उन सबके पिताजी को सलाम
उनकी छोटी सी खता को सलाम
उनकी बिनसांप्रदायिका को सलाम

अहिंसा परमो धर्म:
ये रटाने वाले को सलाम
धर्म हिंसा तथैव च ।
भूल जाने वाले को सलाम
उन तीन बंदरों को सलाम
और उन तीनों को खींचने को तत्पर
भीड़ को सलाम
भीड़ की
खून वाली प्यास को सलाम
सलाम
प्यारे भाइयो बहेनो
सबको सलाम…

जो मरा उसका क्या
सबको एक न एक दिन मरना है
जिसकी दुकान जली
गाड़ी- घर जले उसका क्या
ये तो होता ही है
जिसकी ई रिक्शा की
लोन शुरू भी नही हुई थी
उनकी खाक हुई
रोजी रोटी को सलाम
सैनिक सरहद पर
जिसकी रक्षा पे है
उसने ही सुलगाई हुई
घरेलू चीजो को सलाम

हम अमन पसन्द है
मरवाना हमारी नियति है
इसमे नया क्या है?
ये तो सदियों से होता आया है
इसलिए
मेरे अलावा
दुनिया के हर धर्म को सलाम
मेरे अलावा
दुनिया की हर संस्कृति को सलाम

में कौन हुँ ये मुझे मालूम है
पर ये बोलने में मेरी फटती है
वो “कौन” है वो भी मुझे मालूम है
लेकिन
वो बोलने में तो मेरी और फटती है
इसलिए लहु में घुली हुई
मेरी नपुंसकता को सलाम
मेरे साथ कोई नहीं है
ये मालूम होते हुए भी
मेरी यह सब लिखने की
हिंमत को सलाम
मेरी हैसियत को सलाम
सलाम
प्यारे भाइयो बहेनो
सबको सलाम..

इमरजंसी में शामिल हुई
सेक्युलर समाजवादी
लोकशाही की
इस
उदात्त
अडिग
गर्व करने लायक
धन्य
भावनाको सलाम..
सलाम
प्यारे भाइयो बहेनो
सबको सलाम..

 

( जिज्ञेश अध्यारु, हिन्दी अनुवाद-आरती राजपोपट )

 

[ मूल रचना : गुजराती ]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.