अपना खयाल रखना-आनंद सरिता


ईन दिनों पूरी दुनिया पे ये जो विपदा आई है

हर तरफ तबाही है

पर तुम ईस तबाही का हिस्सा न बनना

और अपना खयाल रखना

 

एक दूसरे से आगे बढ़ने की होड में

हमने ईन्सानों की जिंदगी दाऊ पर लगा दी

पर तू खुद में ईन्सानियत जिंदा रखना

और अपना खयाल रखना

 

सूनों ईस दौर की जंग न बारूद से होगी

और न बंदूकों से होगी

जंग तो अब सिर्फ जैविक हथियारों से होगी

बस तुम कुछ सावधानी रखना

और अपना खयाल रखना

 

सूना है अपने वतन पर मुश्किल की घड़ी है

यहाँ भी हालात कुछ ठीक नहीं है

पर तू मेरी फिक्र न करना

और अपना खयाल रखना

 

वीराना सा लगने लगा है ये शहर

हर तरफ खामोशी है

पर ईस खामोशी में भी

तुम्हारी यादें दस्तक देती है

तुम भी मेरे यादों के अहेसास रखना

और अपना खयाल रखना

 

सूनों अब तुम न कोई गीला रखना

और मैं न कोई शिकायत करूंगी

न जाने साँसो की डोर कब टूट जाये

अगर जिंदा रहे तो फिर मिलेंगे

तुम बस मेरा ईन्तजार करना

और अपना खयाल रखना

 

( आनंद सरिता, दुबई )

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