प्रेम-नरेश गुर्जर ‘नील’

१)
प्रेम
जैसे कोरे घड़े में भरे हुए
ठंडे पानी की महक।
२)
प्रेम
जैसे रेत के टिब्बों पर
हवा से बनी हुई लकीरें।
३)
प्रेम
जैसे नींद आने के ठीक पहले
अधखुली सी आंखें।
४)
प्रेम
जैसे गिलहरी के सूखी रोटी कुतरने से
उपजा संगीत।
५)
प्रेम
जैसे लिखने की प्यास को
परिभाषित करती कोई शब्दावली।
६)
प्रेम
जैसे जितना जान लिया हो
उससे और अधिक जानने का प्रयास।
( नरेश गुर्जर ‘नील’ )

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