एक कोना-उमा त्रिलोक

एक कोना
जो हो रहा है ; और
जो हो चुका है
उसका क्या ?
जो होने वाला है
उसका भी क्या ?
ये तनाव खिंचाव, होहल्ला
शोरोगुल, मारधाड़
मेरे कारण तो नहीं है
फिर इनका भी क्या ?
तालियां, गालियां
उलाहने, अपेक्षायें
उम्मीदें, उत्सुकताएं
मेरे कारण हैं भी,
और नहीं भी
लेकिन
इनका भी क्या ?
सब कुछ
जो देखा, मिला, समझा
उसका भी क्या ?
अब
तलाशती है रूह
एक कोना
सुनसान, वीरान
एकाकी, मौन
.
( उमा त्रिलोक )

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