-
छठ पर्व : मनमीत के नौ शब्द चित्र
1. अगले जन्म में बिहारी बनाना प्रभु अपनी मातृभूमि से दूर कमाने भेजना ट्रेन में लद कर बस में फंस कर घर लौटने देना प्रभु इतना पैसा मत देना कि दिल्ली से उडूं और पटना उतर जाऊं! . 2. सूरज और पानी की दोस्ती का यह पर्व मुझे बहुत अपना लगता है – सीने में…
-
आविष्कार-कुमार सुरेश
एक छोटी बच्ची को नहलाकर यूनिफार्म पहनाना बनाकर विद्यार्थी स्कूल भेजना आविष्कार है मेधा के नए पुंज का किसी शब्द को अर्थ के नए वस्त्र पहनाना कविता का रूप देना आविष्कार है शब्द के नए सामर्थ्य का जो सब कह रहे हों क्योंकि कह रहा है कोई ख़ास एक से हटकर अलग वह कहना जो अंतरात्मा…
-
घर-देवेन्द्र आर्य
लौटूंगा बार बार लौटूंगा लौटने के लिए ही होता है घर घर न हो तो लौटना कहाँ? लौटना न हो तो जाना कहाँ? एक घर ही तो है जहाँ से जाया जा सकता है कहीं जहाँ लौटा जा सकता है कहीं से भी कभी भी घर है तो इंतज़ार है इंतज़ार ही घर है .…
-
खिड़की वाली सीट-मोनिका कुमार
जीवन में ख़ुशी के लिए कम ही चाहिए होता है, वह कम कई बार बस इतना होता है हमें जब बसों, गाड़ियों और जहाज़ों में यात्रा करनी हो, तो हम इतने भाग्यशाली हों, कि हमें खिड़की वाली सीट मिल जाए, हम टिकट लेकर बग़ैर सहयात्रियों से उलझे, सामान सुरक्षित रखने के बाद, आसानी से अपनी…
-
પડ્યું હોય તે પ્રગટે-માનસી એમ. પાઠક
પડ્યું હોય તે પ્રગટે વ્હાલા પડ્યું હોય તે પ્રગટેઆથમે, ઊગે, ધરબાય ભલે ને અટકે . . મનની ભીની ધરતીએ રોજજજે પડતા ચાસઊગી નીકળતું કેટલુંય અડાબીડ, હોય નજીવું કે ખાસએક વિચારને પાળો, પોષો, ત્યાં તો બીજો છટકેપડ્યું હોય તે પ્રગટે. . કદીક રહેશે રમમાણ એવું, કદીક ફરશે સંતાતુંરહેશે એવું લીન ભલે તને ન બતાતુંરાખશે તારું ધ્યાન…
-
मेरे एकांत का प्रवेश-द्वार-निर्मला पुतुल
यह कविता नहीं मेरे एकांत का प्रवेश-द्वार है यहीं आकर सुस्ताती हूँ मैं टिकाती हूँ यहीं अपना सिर ज़िंदगी की भाग-दौड़ से थक-हारकर जब लौटती हूँ यहाँ आहिस्ता से खुलता है इसके भीतर एक द्वार जिसमें धीरे से प्रवेश करती मैं तलाशती हूँ अपना निजी एकांत यहीं मैं वह होती हूँ जिसे होने के लिए…
-
जले मन पर एक फूँक-सुनीता करोथवाल
बचपन में घर में दवाई का कोई डिब्बा नहीं थाबस एक फूँक थीजरा भी दर्द होताएकदम उनके मुँह से निकलती बिन सोचे समझे। . मैं नाजुक सी थीचलते, उठते, बैठते रोज चोट खातीबाबा कहते अरे देख तो कीड़ी मार दीमुझे उसके मरने का अफ़सोस होताबाबा फूटे घुटने पर तब फूँक मारतेऔर मैं भूल जाती सबकुछ।…
-
વલસાડના સતીમાતા મીઠીબાઈ અને તેમનો ગરબો-હિના એમ. પારેખ
હિન્દુ ધર્મમાં શ્રદ્ધાનો અર્થ છે – ભગવાન પ્રત્યેનો વિશ્વાસ, પ્રેમ અને ભક્તિ. શ્રદ્ધા વગર કોઈ પણ પૂજા, જપ કે પ્રાર્થના પૂર્ણ મનાતી નથી. . ભગવદ્ ગીતા કહે છે કે જે કોઈ શ્રદ્ધાથી ભગવાનને સ્મરે છે, તેની ભક્તિ નિષ્ફળ નથી જતી. શ્રદ્ધા એટલે અંધવિશ્વાસ નહીં, પણ હૃદયથી ઊંડો વિશ્વાસ કે ભગવાન મારા રક્ષક છે અને મારી…
-
कभी आ भी जाना-गुलज़ार
कभी आ भी जानाबस वैसे ही जैसेपरिंदे आते हैं आंगन मेंया अचानक आ जाता हैकोई झोंका ठंडी हवा काजैसे कभी आती है सुगंधपड़ोसी की रसोई से . आना जैसे बच्चा आ जाताहै बगीचे में गेंद लेनेया आती है गिलहरी पूरेहक़ से मुंडेर पर .. जब आओ तो दरवाजेपर घंटी मत बजानापुकारना मुझे नाम लेकरमुझसे समय…
-
આવક જાવકનો તાલમેલ – યુવાનો માટે ખાસ ટીપ્સ
. પગાર પહેલી તારીખે આવે છે પરંતુ મહિનાની પંદર તારીખે તો આખર તારીખ આવી જાય છે. . 25-35 વર્ષના વયજૂથના કે એનાથી વધુ ઉંમરના ઘણાંની પાસેથી આ વાત સાંભળવા મળે છે. આના માટે શું કરવું? . પ્રાઇવેટ કે પબ્લિક સેક્ટરમાં કામ કરી રહેલા કર્મચારીઓ (વેપારી કે એન્ટ્રેપ્રેન્યોરને પણ લાગુ પડી શકે છે) વર્ગ માટેની અનુભવોક્તિ:…
-
Home