टुकडे-टुकडे दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
जितना-जितना आंचल था, उतनी ही सौगात मिली
रिमझिम-रिमझिम बूंदो में, जहर भी है और अम्रुत भी
आंखे हंस दीं दिल रोया, यह अच्छी बरसात मिली
जब चाहा दिल को समझें, हंसने की आवाज सुनी
जैसे कोई कहता हो, ले फिर तुझको मात मिली
मातें कैसी घातें क्या, चलते रहना आठ पहर
दिल-सा साथी जब पाया, बेचैनी भी साथ मिली
होंठों तक आते-आते, जाने कितने रूप भरे
जलती-बुझती आँखो में, सादा-सी जो बात मिली
( मीना कुमारी )




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મીનાકુમારી વસીયતમાં પોતાની નઝમ અને ગઝલ ગુલઝાર સાહેબને સોંપતી ગઇ હતી જેનું સંપાદન મીનાકુમારી કી શાયરીના નામે થયું સરસ ગઝલ એમના અવાઝમાં સાંભળી હતી