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  • पेड-ईमरोझ

    कल तक जिन्दगी के पास एक पेड था जिन्दा पेड फूलों फलों और महक से भरा… और आज जिन्दगी के पास सिर्फ जिक्र है – पर है जिन्दा जिक्र उस पेड का… पेड जो अब बीज बन गया और बीज हवाओं के साथ मिल कर उड गया है पता नहीं किस धरती की तलाश में……

  • रखजा-हनीफ साहिल

    भूली बिसरी कहानीयां रखजा, कुछ तो अपनी निशानीयां रखजा. फिर न रक्से बहार याद आए, झर्द शाखों पे तितलीयां रखजा. कच्ची नींदों के ख्वाब की ताबीर, आज पलकों के दरमियां रखजा. हिज्र की ईन सियाह रातों में, चांदनी की तजल्लीयां रखजा. मेरे लफझों को शादमानी दे, फिर गजल में रवानीयां रखजा. तेरी मेरी शरारतें शिकवे,…

  • ચીંધાય ગૈ-અંજુમ ઉઝયાન્વી

    વાંસની મૂડી બધી ખર્ચાય ગૈ, ધૂળ અંતે ધૂળમાં વેરાય ગૈ ! ખેલ છે કે વેર છે, કોને ખબર, શાંત જળમાં કાંકરી ફેકાય ગૈ ! જિંદગીભર સાચવી રાખી હતી, એ કિતાબો પસ્તીમાં વેચાય ગૈ ! ટાઢ તડકો ભાગ્ય ના ભેરુ થયા, વેદના શું ચીજ છે ભૂલાય ગૈ ! ક્યાં જવું નક્કી કરી શક્યો નહીં, વાટ, તારા…

  • धीरे बोल-खलील धनतेजवी

    एक ने बोला जोर से बोलो,दूजा बोला धीरे बोल, फिर मुजको समझाने आया पूरा टोला धीरे बोल. रात का सन्नाटा केहता है परी उतरने वाली है, हो सकता है यहीं पे उतरे उडनखटोला धीरे बोल. आंधी भी कुछ दूर हवा का भेस बदल कर बैठी है, तू क्या जाने, किस ने पेहना किस का चोला…

  • છું હું શૂન્ય-સાહિલ

    છું હું શૂન્ય-શૂન્યની ન્યાતમાં-ન તમારી કોઈ મિસાલ છે, રૂંવેરૂંવે લોહી-લુહાણ હું-ને તમારું હોવું ગુલાલ છે. હું અને વીતેલા સમયની વચ્ચે ફરક લગારે નથી મળ્યો, હુંય પણ અધૂરો ખયાલ છું-એય પણ અધૂરો ખયાલ છે. રહ્યા જીવજીને પરમ મુકામે લઈ જવામાં રચ્યા-પચ્યા, તમે જેને શ્વાસ કહો છો એ તો સ્વયં હરિના હમાલ છે. મેં દિવસ ને રાત…

  • ફૂલની ખુશ્બૂ તમે-ખલીલ ધનતેજવી

    ફૂલની ખુશ્બૂ તમે, કોયલનો ટહુકો પણ તમે, મખમલી ઝાકળ તમે, સૂરજનો તડકો પણ તમે. સ્મિતની માફક તમે મરકો છો સૌના હોઠ પર, બ્હાવરી આંખોમાં સળવળતો અચંબો પણ તમે. એટલે તો ચાલવાનો થાક વરતાતો નથી, મારી મંજિલ પણ તમે છો, મારો રસ્તો પણ તમે ! કાં તરીને પણ ઊતરું, ક્યાંક હું ડૂબી મરું, મારી હોડી પણ…

  • कभी हंसा के गया-खलील धनतेजवी

    कभी हंसा के गया, फिर कभी रुला के गया, गरज कि मुजको वो हर रुख से आजमा के गया. मैं अपने मूंह से बडी बात तो नहीं करता, यहां का जिल्लेइलाही भी घर पे आ के गया. गजब तो ये कि उजालों की सल्तनत वाला, मेरे चिराग से अपना दिया जला के गया. जिसे बुला…

  • यूं भी कब-खलील धनतेजवी

    यूं भी कब नींद से नजदीक भी होने देती, तु न होता तो तेरी याद न सोने देती राह में मेरी हर इक मोड पे इक दरिया है कोई तो होती नदी, होंठ भीगोने देती रात बच्चे की तरह दिल ने परेशान किया, नींद आ जाती तो ख्वाबों के खिलोने देती मछलियां घास पर जीने…

  • सोचा क्या है ?-खलील धनतेजवी

    आज वो घर, वो गली या वो मुहल्ला क्या है ! तु नहीं है तो तेरे शहेर में रख्खा क्या है ? मैं संवारुंगा किसी रोज यकीनन तुजको, जिन्दगी, तूने मेरे बारे में सोचा क्या है ? गौर से सुनना मुखातिब को मेरी आदत है, आंख चहेरे को भी पढ लेती है लिख्खा क्या है…

  • लम्हें लम्हें पर-चिनु मोदी

    लम्हें लम्हें पर तुम्हारा नाम था मैं सफर में इस तरह बदनाम था जूस्तजू थी, जूस्तजू थी, जूस्तजू, तैरती मछली का अब भी काम था मौत को आवाज दे कर भी बुला, अब शिकस्ता जिन्दगी का जाम था बंद दरवाजे पर दस्तक रात-दिन साँस का यह आखरी पैगाम था मैंकदे मैं बैठकर पीते रहे इस…

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