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બસ ફરજ ચૂકી ગયો-પાર્થ મધુકૃષ્ણ
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હીરામંડી-સમાજના કલંકને ભપકાદાર આર્ટ તરીકે ચીતરવાની કુત્સિત વૃત્તિ- જિજ્ઞેશ અધ્યારૂ
જ્યારે સાહિત્ય કે કળાનું સ્વરૂપ સંજયભાઈ ભણશાળીની કૃતિ ‘હીરામંડી’ની જેમ ફક્ત ભવાડો બનીને રહી જાય, કળાને નામે સમાજના નકારાત્મક પાસા, નઠારી બાબતો અને વિકૃતિઓને કારણ વગર ભવ્યતા આપી એને સહજ પ્રસ્થાપિત કરવાનો પ્રયત્ન કરે ત્યારે એ કૃતિનું યથોચિત સન્માન થવું જરૂરી છે. . શ્રી સંજયભાઈ લીલાબેન ભણશાળીએ બનાવેલી વેબશ્રેણી હીરામંડી જોઈ. સંજયભાઈને આમ પણ…
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लड़के हमेशा खड़े रहे-सुनीता करोथवाल
. लड़के हमेशा खड़े रहे खड़ा रहना उनकी कोई मजबूरी नहीं रही बस उन्हें कहा गया हर बार चलो तुम तो लड़के हो खड़े हो आओ तुम मलंगों का कुछ नहीं बिगड़ने वाला छोटी-छोटी बातों पर वे खड़े रहे कक्षा के बाहर . स्कूल विदाई पर जब ली गई ग्रुप फोटो लड़कियाँ हमेशा आगे बैठी…
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હશે એ મિત્ર સાચો-હિમલ પંડ્યા
. કહો ને! ક્યાં સુધી આ જિંદગી પર કાટ હોવાનો? કદી એવો દિવસ પણ આવશે, ચળકાટ હોવાનો! . હંમેશા એ જ કરવું જે સુઝાડે માંહ્યલો તમને, મૂકો દરકાર એની, બ્હાર તો ઘોંઘાટ હોવાનો! . લગાડો ના કદી એની કશીયે વાતનું માઠું; હશે એ મિત્ર સાચો સાવ તો મોંફાટ હોવાનો! . કરું છું બંધ મુઠ્ઠીને, સરકતો…
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रामलला-मनमीत सोनी
. आँख सरयू है आज रामलला। तू ही हर सू है आज रामलला। . दिन किसी फूल-सा महक उट्ठा रात ख़ुशबू है आज रामलला। . हम भी सूरज हैं तेरी रहमत से कौन जुगनू है आज रामलला? . बाद आबाद कितनी सदियों के तेरा पहलू है आज रामलला। . वो तिहत्तर बरस का बूढा शख़्स…
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राम : कुछ शब्द-चित्र : भाग पांच-मनमीत सोनी
. 1. क्योंकि अब मैं अपने राम का कवि हूँ- क्या इसीलिए तुम्हारे काम का कवि नहीं हूँ? . 2. मैं कवि हूँ मैं भक्त नहीं हूँ.. जाओ! और मुझे इस अवसाद में घुलने दो कि रामराज्य आ भी गया तो जीवन-मृत्यु का क्या होगा? . 3. सीताएँ धरती में समाती रही हैं.. राम नदियों…
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राम : कुछ शब्द-चित्र : भाग चार-मनमीत सोनी
. 1. मेरे राम ईश्वर राम हैं केवल सेनानायक राम नहीं.. राम के विरुद्ध बोलने से वह बस राम का नहीं रहता लेकिन राम का नहीं रहने से वह रावण का भी तो नहीं हो जाता! . 2. कैकेयी एक चालाक रानी-भर नहीं थी- कैकेयी दरअसल दशरथ के भीतर की एक बहुत पुरानी बेचैनी थी…
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राम : कुछ शब्द-चित्र : भाग तीन-मनमीत सोनी
. 1. अजी! क्या आपको मुझ पर शक है? “कैसी बात करती हो सीते? बिलकुल नहीं!” तो फिर डरते क्यों हैं? “डरता हूँ कि लोग फिर भी बहुत कुछ कहेंगे!” लोगों को भूल जाइये! “कैसे भूल जाऊँ! मेरी प्रजा है!” सीताजी के तन-बदन में आग लग गई। कालांतर में कुछ भोले और मूर्खों ने इसे…
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राम : कुछ शब्द-चित्र : भाग दो-मनमीत सोनी
. 1. मैं दावे से तो नहीं कह सकता फिर भी ऐसा लगता है कि वनवास का सुख भोगने के बाद रामजी का मन अयोध्या में लगा नहीं होगा! . 2. कैकेयी तो बहाना था वह तो वैसे भी वनवास जाता- जो इतना विनम्र था जो इतना सहनशील था और जिसने माता-पिता के झगड़े देखे…
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राम : कुछ शब्द-चित्र : भाग एक-मनमीत सोनी
. 1. मुझे क्यों लग रहा है कि मैं वही केवट हूँ और इस रेगिस्तान में बह रही है एक नदी.. जो अयोध्या जा रही है! . 2. मैं अपने घर का बड़ा ही बड़ा बेटा हूँ और इस नाते मैं एक छोटा-मोटा राम ही तो हुआ.. मुझे रामजी की सौगंध कि मैं सगे, चचेरे…
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