Tag Archives: हिन्दी कविता
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मुझे दे दो-साहिर लुधियानवी
तुम अपना रंज-ओ-गम, अपनी परेशानी मुझे दे दो
तुम्हें उन की कसम, ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो
मैं देखूं तो सही, दुनिया तुम्हें कैसे सताती है
कोई दिन के लिए अपनी निगहबानी मुझे दे दो
ये माना मैं किसी काबिल नहीं हूँ ईन निगाहों में
बुरा क्या है अगर ईस दिल की वीरानी मुझे दे दो
वो दिल जो मैंने माँगा था मगर गैरों ने पाया था
बडी शै है अगर उस की पशेमानी मुझे दे दो
( साहिर लुधियानवी )
[निगहबानी – देख रेख, वीरानी – उजडापन, पशेमानी – पछ्तावा]
तारों की झिलमिल-मुनि रूपचन्द्र
तारों की झिलमिल से
कोई बिछुडा दिल यदि मिलता है तो मिल लेने दो.
तुम ने था जो दीप जलाया
साँझ हुई तो वह घबराया
तम-किरणों की घुल-मिल में
नव-दीपक कोई जलता है तो जल लेने दो.
तुम ने था जो फूल खिलाया
वह तो पतझर में मुरझाया
मन सावन की रिमझिम से
यदि नया सुमन कोई खिलता है, खिल लेने दो.
नभ से जो सरिता है आयी
उस से प्यास नहीं बुझ पायी
आँसू की निर्मल कल-कल से
कोई गंगा ढलती है तो ढल लेने दो.
अब तक जो हैं गीत सुनाये
वे मेरे थे या कि पराये
उन गीतों की सरगम से
यदि कोई पीडा हँसती है तो हँस लेने दो.
( मुनि रूपचन्द्र )
दर्द का लालच-हेमेन्द्र चण्डालिया
अहसास के सैलाब में
डूबत-उतराते
बहुत बार भींच लेता हूं पलकें
कण्ठ हो जाता है अवरुध्ध
फूटने लगती हैं अनायास
दिल से, आँखों से
कुछ तरल संवेदनाऍ
शब्दों की सीमाओं से परे.
अपने आप से
जो कहा है तुमने
अपने आप
जो सहा है तुमने
उस दर्द को
छू भी नहीं सकता मैं
देखता हूँ, बस दूर से
लालच से
एक टूकडा कहीं से
हाथ लग जाए
मेरे भी.
( हेमेन्द्र चण्डालिया )
