खेल – ईमरोज

रंगो के साथ खेल

हो रहा था

कि तू आ गयी

अपने रंगो मिला कर खेलने…


खयालों के खाके

तस्वीरें बनने लग गये

और जिन्दगी अपने आप कविता

और कविता अपने आप

जिन्दगी हो कर

खयालों के साथ

आ मिली…


( ईमरोज )

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