
1.
अगले जन्म में
बिहारी बनाना प्रभु
अपनी मातृभूमि से दूर कमाने भेजना
ट्रेन में लद कर
बस में फंस कर
घर लौटने देना प्रभु
इतना पैसा मत देना
कि दिल्ली से उडूं
और पटना उतर जाऊं!
.
2.
सूरज और पानी की दोस्ती का यह पर्व
मुझे बहुत अपना लगता है –
सीने में
दर्द का एक सूरज लिए
आँखों में आए आंसुओं को बुझाने का
पुराना खिलाड़ी रहा हूँ मैं!
.
3.
आज जब पूर्वांचल की एक सुहागिन को
ठेठ मांग से लेकर
नाक तक केसरिया सिंदूर में देखा
तो मैंने अपनी पत्नी से कहा :
मत लगाया करो यह लिक्विड सिंदूर…
लाओ!
पिछली होली का ग़ुलाल बचा होगा
मैं तुम्हें मांग भरना सिखाता हूँ…
.
4.
चाहे राजस्थान की सीमा मिश्रा हो
या आसाम का ज़ुबिन गर्ग
या बिहार की शारदा सिन्हा :
गीत वही हैं
बस कंठ बदल जाते हैं!
.
5.
मैं
पानी में जब भी कमर तक डूबा
आत्महत्या की इच्छा सर उठाने लगी –
अगर बिहारियों को
पानी में कमर तक डूबकर
सूरज को अर्घ्य देते नहीं देखता
तो आत्महत्या की इस इच्छा में..
नाक तक डूब जाता!
.
6.
“खरना” हो चाहे “परना” हो..
हे छठी मैया हमें तेरा सरणा हो!
.
7.
आप दुनियादार लोग हैं
आप सूरज की पूजा करते हैं –
मैं एक कवि मन हूँ
मैं चाँद की पूजा करता हूँ –
रौशनी का आधा पुल
धूप से बनता है
और आधा चांदनी से!
.
8.
एक घाट है
उस पर स्त्रियां हैं
फलों की टोकरियां हैं
सूरज है
पानी में उसकी किरणेँ हैं
अगरबत्तियों और दीपकों का धुआं है
गीत हैं
कंठ हैं
आभार है
भावुकता है
केवल यह भी बचा रहे
तो पूर्वांचल वाले
धरती पर प्रलय के बाद
नई सृष्टि बसा सकते हैं!
.
9.
बिहारियों को देखता हूँ
तो ऐसा लगता है
इन्होंने अपनी जड़ों को सींचकर
यह आकाश कमाया है
लेकिन
इतना कमज़ोर क्यों समझ लिया गया
जड़ों को सींचने वाले
इन महान धरती पुत्रों को?
कि इन्हें
घास बना दिया गया
जिस पर सौ-दो सौ रुपये दिहाड़ी चढ़ा कर
साला कोई मसल देना चाहता है!
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( मनमीत सोनी )