तुम अपना रंज-ओ-गम, अपनी परेशानी मुझे दे दो
तुम्हें उन की कसम, ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो
मैं देखूं तो सही, दुनिया तुम्हें कैसे सताती है
कोई दिन के लिए अपनी निगहबानी मुझे दे दो
ये माना मैं किसी काबिल नहीं हूँ ईन निगाहों में
बुरा क्या है अगर ईस दिल की वीरानी मुझे दे दो
वो दिल जो मैंने माँगा था मगर गैरों ने पाया था
बडी शै है अगर उस की पशेमानी मुझे दे दो
( साहिर लुधियानवी )
[निगहबानी – देख रेख, वीरानी – उजडापन, पशेमानी – पछ्तावा]
