प्यास होती तो सलिल में डूब जाती,
वासना मिटती न तो मुझको मिटाती,
पर नहीं अनुराग है मरता किसी का;
प्यार से, प्रिय, जी नहीं भरता किसी का.
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तुम मिलीं तो प्यार की कुछ पीर जानी,
और ही मशहूर दुनिया में कहानी,
दर्द कोई भी नहीं हरता किसी का;
प्यार से, प्रिय, जी नहीं भरता किसी का.
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पाँव बढते, लक्ष्य उनके साथ बढता,
और पल को भी नहीं यह क्रम ठहरता,
पाँव मंजिल पर नहीं पडता किसी का;
प्यार से, प्रिय, जी नहीं भरता किसी का.
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स्वप्न से उलझा हुआ रहता सदा मन,
एक ही इसका मुझे मालूम कारण,
विश्व सपना सच नहीं करता किसी का;
प्यार से, प्रिय, जी नहीं भरता किसी का.
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( हरिवंशराय बच्चन )